बिहार विधानसभा चुनाव इस समय राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। भले ही चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सियासी सरगर्मियां चरम पर हैं। भाजपा, जदयू, राजद, कांग्रेस और जनसुराज जैसी प्रमुख पार्टियां अपने-अपने रणनीतिक दांव आजमा रही हैं।
इस बीच, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में सीटों का बंटवारा तय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, जनता दल यूनाइटेड (JDU) को 102 और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 101 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। वहीं, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (R)] को 20 सीटें दी गई हैं। जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) और उपेंद्र कुशवाहा के राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 10-10 सीटें दी गई हैं।
पिछली गलती से सबक, चिराग की वापसी से बदला समीकरण
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान चिराग पासवान की NDA में वापसी और सीटों को लेकर खींचतान सामने आई थी। हालांकि, तब उन्हें आश्वासन दिया गया था कि बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें बेहतर हिस्सेदारी मिलेगी। अब वही वादा पूरा होता दिख रहा है। भाजपा ने एक बार फिर चिराग को साथ लाकर एनडीए को मजबूती देने का फैसला किया है। दूसरी ओर, रामविलास पासवान के भाई पारस इस रणनीति को नहीं समझ सके और खुद को अलग करते हुए मंत्री पद भी छोड़ दिया।
नीतीश के नाम पर चुनाव, जदयू की सीटों में कोई कटौती नहीं
एनडीए के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “पिछली बार जदयू का प्रदर्शन LJP की वजह से कमजोर हुआ था। बावजूद इसके जदयू की बिहार में लगभग 10% वोट हिस्सेदारी आज भी बरकरार है, खासकर EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) में।” उन्होंने कहा कि यह चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाने पर पूरा जोर है। उनके मुताबिक, जदयू को भाजपा से कम सीटें मिलने का सवाल ही नहीं उठता, हालांकि सहयोगी दलों को समायोजित करने के लिए कुछ फेरबदल ज़रूर हो सकते हैं।
बिहार चुनावों को लेकर गठबंधन की रणनीति अब स्पष्ट होती जा रही है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इसके जवाब में क्या रणनीति अपनाता है।